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मिट्टी का क़र्ज़

ये मिट्टी सिर्फ़ धूल नहीं, शहीदों का लहू है
हर कण में गूँजती भारत माँ की आबरू है
जिसे सींचा है पुरखों ने अपनी साँसों से
वो धरती माँ का आँचल, मेरा वजूद, मेरा गुरूर है

हिमालय सर पर ताज है, गंगा पैरों की पायल
तीन रंगों में बसा है करोड़ों दिलों का घायल
कहीं मंदिर की घंटी, कहीं अज़ान की सदा
यही तो मेरा हिंदुस्तान है, यही इसकी अदा

सरहद पर जो खड़ा है, वो किसी का बेटा है
गोली सीने पर खाता है, फिर भी कहता है
“माँ तुझे सलाम”
उसकी वर्दी पर लगा ख़ून का हर धब्बा
मेरे मुल्क का सबसे बड़ा इनाम

जात-पात की दीवारें जो हमें बाँटने आएँ
उनको बता दो हम एक तिरंगे की परछाई हैं
मंदिर-मस्जिद के नाम पर जो आग लगाएँ
उनको बता दो हम भगत और अशफ़ाक़ के भाई हैं

अमन कहता है सुन लो दुनिया वालों
हम वो हैं जो मोहब्बत से जीते हैं
मगर आँख उठा कर जो देखे वतन को
उसकी आँखों में बारूद भी पीते हैं

ये देश सिर्फ़ नक़्शा नहीं, एहसास है
हर साँस में बसा हुआ इतिहास है
मिट जाएँगे मगर झुकने नहीं देंगे
क्योंकि सर पर कफ़न बाँधा है, और दिल में विश्वास है

भारत माता की जय!

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)

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