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संवत् २०८३ अधिक ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष सोमवती अमावस्या के विशेष पर्व पर आपको मंगल कामना ।।
मानं हित्वा प्रियो भवति
क्रोधं हित्वा न शोचति ।
कामं हित्वाऽर्थवान्भवति
लोभं हित्वा सुखी भवेत् ।।
महाभारत, वनपर्व - ३१३/७८
अर्थात् —-
मनुष्य मान का त्याग करने से लोगों का प्रिय हो जाता है, क्रोध को त्यागने से शोक नहीं करता है, कामवासनाओं को त्यागने से धनवान होता है और लोभ को त्यागने से सुखी होता है ।।
हरिकृपा ।।
मंगल कामना ।।










