
आज नशे की गिरफ़्त में है युवा भारत
युवा के सपनों का श्मशान बनता भारत
पहले जिन हाथों में कलम- किताब
होते थे
आज उन्हीं हाथों में सिगरेट, गुटका होते हैं
ड्रग्स का जहर नस-नस में दौड़ रहा है
भारत का होने वाला भविष्य अंधेरे में झूल रहा है
नशे की लत में बिक जाता है अपना ईमान
मां-बाप का धूमिल हो जाता है सम्मान
पहले दोस्त कहते थे “चल यार लाइब्रेरी चलें”
अब बोलते हैं “चल यार सिगरेट का दो कश लगाने चलें”
एक कश लेते-लेते आदत बन जाती है
और यह नशे का खेल बढ़ता ही जाता है
अरे उठो नौजवानों! ये राह मौत की मत चुनो
आओ संकल्प लें, नशे से रहें दूर
चाहे कोई करे कितना भी मजबूर
युवा भारत की आन बान और शान है “नशा छोड़ो जीवन जोड़ो” नये भारत का निर्माण करो
डॉ मीना कुमारी परिहार









