
जब एक बेटे का जन्म होता है,सब हंसते हैं वह रोता है।
लोग मानते हैं कि बेटे ने जन्म लिया है, लेकिन असल में एक पिता का जन्म होता है।।१।।
मां से बढ़कर कोई नहीं, मां कभी चैन से सोई नहीं।
पिता को सबने अनदेखा किया पर, सत्य यह है कि पिता से बढ़कर कोई नहीं।।२।।
सुबह निकलते शाम को आते, रोजाना वह काम पर जाते हैं।
भूखे हो या चाहे प्यासे, कभी किसी को कुछ ना बताते।
खुद के चाहे कपड़े फटे हो पहले बच्चों को ड्रेस दिलाते।
सबसे ज्यादा प्यार वो करते कभी किसी को नहीं जताते।।३।।
ऐसा लगता है वह इंसान नहीं मशीन है।खुदा की यह रचना सबसे हसीन है।
पिता मानता है कि बच्चों में उसकी दुनिया है, लेकिन बच्चों के लिए पिता ही आसमान पिता ही जमीन है।।४।।
बच्चे जब छोटे होते हैं तो पिता से प्रेम करते हैं।
पापा की एक डांट से घर में, बच्चे बहुत ही डरते हैं।
बच्चों के निश्छल प्रेम से ज्यादा प्यार पिताजी करते हैं।
खुद चाहे संकट में हो लेकिन बच्चों के संकट हरते हैं।।५।।
बच्चे जब बड़े हो जाते पिता की कदर नहीं करते।
खुद को ज्यादा ज्ञानी जान के उनकी अवज्ञा करते हैं।
चाहे दुष्ट निकल जाए बच्चे फिर भी पिता भला करते हैं।
संस्कारों की खान पिताजी बच्चों के लिए जीते मरते हैं।।६।।
जब तक बेटा पिता ना बन जाए, तब तक पिता की महत्वता को नहीं समझता।
जब पिता को समझने लगता है तब तक पिता नहीं रहता।।७।।
मानव जन्म लिया है बंधु मानवता स्वीकार करो।
संतान से बढ़कर के प्यारे जन्मदाता के कर्जदार हो।
सच्चे मन से सेवा करके उनकी उम्र बढ़ाओगे
अपना भविष्य सँवारोगे खुद कभी वृद्धाश्रम नहीं जाओगे।।८।।
देवी देवता सब ने पूजे माता-पिता भूलाए हैं।
चार धाम की यात्रा करने पूरे देश में जाएं हैं।
श्री गणेश कि मानो तो माता-पिता में सारे देव समाए हैं।
माता-पिता की पूजा करके वे प्रथम पूज्य कहलाए हैं।।९।।
सूरज की बस एक विनय है माता-पिता की सेवा करो।
सेवा करें जो माता-पिता की दुनिया में ठोकर ना खाओगे।
यदि रखोगे खुश माता-पिता को जग में जाने जाओगे।
कलयुग में पैदा होकर भी पुरुषोत्तम कहलाओगे।।१०।।
सूरज सिंह महावर
(सूरज आर्ट दौसा)













