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धन्य हूँ मैं…

परमपिता तो मेरे भोलेनाथ हैं,
जिनकी छाया में सारा संसार है।
पर इस धरती पर जिन्होंने
उनका मार्ग दिखाया,
वे मेरे माता-पिता हैं—
यही मेरा सबसे बड़ा संस्कार है।

धन्य हूँ मैं कि मुझे ऐसे पिता मिले,
जिन्होंने केवल उँगली पकड़कर चलना नहीं सिखाया,
बल्कि जीवन का उद्देश्य,
मानव होने का अर्थ,
और सत्य के पथ पर अडिग रहना भी सिखाया।

उन्होंने बताया कि
मनुष्य का वास्तविक धन पद या वैभव नहीं,
उसके संस्कार, उसका चरित्र
और ईश्वर से जुड़ा उसका अंतर्मन है।

महादेव की असीम कृपा है मुझ पर
कि उन्होंने मुझे ऐसे माता-पिता का स्नेह दिया,
जो केवल जन्मदाता नहीं,
मेरे जीवन के प्रथम गुरु भी हैं।

पितृ दिवस पर मैं अपने पिता को प्रणाम करती हूँ,
और परमपिता महादेव से यही प्रार्थना करती हूँ—
हर जन्म में आपका आशीर्वाद मिले,
और ऐसे ही माता-पिता का सान्निध्य प्राप्त हो।

हर हर महादेव।

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