
ऐक नेताजी बोले दादा आप आईये हमारी तारिफ में बक 2 किजिये!
मेने कहां मान्यवर मैं मां शारदे उपासक हूं तुम्हारी तरह नेता नहीं !
बक 2 करुं बेकार की सच बोलता हूं मैं तुम्हारी तरह झूंठ कहता नहीं!
वो मुस्कराकर बोला फिर चुपचाप अपने घर बेठिये!
हम नेता हैं ये काम हमारा हैं आप व्यर्थ प्रचारक बन हमें लपेटिये!
प्रचार में तारिफो के बड़े 2 पुल बनाना पड़ते हैं!
बंजर जमीं हो उसमें विश्वास के फुल खिलाने पड़ते हैं!
तुम केवल फेशबुक पे लिखो तुम दिखा सकते झूंठ सत्य चमत्कार नहीं!
दादा प्रचारक चाहिए हमें आपसे खाली चाहिए दुआ प्यार नहीं!













