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गजल

काफिया- आना की बंदिश
रदीफ-धरती पर
मापनी- २२ २२ २२ २२ २२ २

साँसों का उपहार बचाना धरती पर,
होगा हमको पेड़ लगाना धरती पर॥

नदियों का निर्मल जल रखना है हमको,
कूड़ा कचरा मत फैलाना धरती पर।

शुद्ध हवा का सुख पाना है यदि हमको,
हरियाली का दीप जलाना धरती पर।

पक्षी,पशु,मानव सबका यह घर आँगन,
प्रेम,दया, सद्भाव जगाना धरती पर।

“सुरभि” धरा के ऋण को हम आज चुकाएं,
मिलकर सुंदर विश्व बनाना धरती पर।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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