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गम छुपाती है आंखें

होती हैं मन का आईना,
हर पल सच ही बतलाती हैं।
पर बड़ी जादूगरी है इनकी,
अक्सर गम छुपाती हैं आंखें।

खूबसूरती इन आंखों की,
उस पल और झलकती है।
दिखती है बेचैनी चेहरे पर,
फिर भी मुस्कुराती हैं आंखें।

अच्छे बुरे का बोध कराती,
बुरी नजर को भांप लेती हैं।
करती हैं नजरों से ही वार,
कभी नहीं कतराती आंखें।

अधरों के नीरवता को यह,
जुबां बनकर बयां करती हैं।
तोड़ देती हैं पसरे मौन को,
अदब से संवाद करती हैं आंखें।

जानती प्रेम और विरह की भाषा,
दोनों का मर्म खूब समझती हैं।
जहां मचलती हैं प्रेम में अक्सर,
वियोग में तड़पती हैं यह आंखें।

आए खुशियों का दौर जब भी,
इजहार आंसुओं से करती हैं।
वेदना हृदय की न हो सरेआम,
इसी कोशिश में गम छुपाती हैं आंखें।

उर्मिला ढौंडियाल ‘उर्मि’
‌‌ देहरादून (उत्तराखंड)

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