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गवाह

फ़िक्र किसको कितनी है, दूरियां बताती है
याद कौन करता है हिचकियां बताती है

लफ्ज़ नहीं बोलते फिर भी सब बयां हो जाता है,
आंखों का समंदर तूफान बताता है।
जो महफिल में साथ बैठे और दिल से दूर हों,
उन चेहरे के नकाब हालात बताते हैं।

चुप रहकर जो दिल का हाल कह दे,
उस खामोशी की गहराई तन्हाइयां बताती हैं।
हंसते-हंसते जो अंदर ही अंदर घुट जाए,
उस मुस्कान का जख्म परछाइयां बताती हैं।

रिश्ते सौदे नहीं होते जो तोल कर निभाए जाएं,
मतलब के यार वक्त आने पर आजमाए जाते हैं।
जो अंधेरों में भी दिया बनकर जले,
उस अपनापन की कीमत रिश्ते बताते हैं।

एक शोला बुझता है एक शोला जलता है
हर अंधेरे के बाद कोई सवेरा पलता है।
गिरकर जो फिर उठ खड़ा हो,
उसकी हिम्मत की इबारत मंजिलें बताती हैं।
जो हार कर भी हौसला न हारे,
उसकी असली जीत किस्मत बताती है।

वक्त का पहिया सबको घुमाता है,
कौन अपना है कौन पराया आईने बताते हैं।
सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के परदों से,
खुशबू दब नहीं सकती कागज के फूलों से।

रात कितनी भी लंबी क्यों न हो,
सुबह का आना तय है, ये उजालियां बताती हैं।
ख़त्म कुछ नहीं होता आंधियाँ बताती है
राख के ढेर में भी चिंगारी जिंदा रहती है,
और टूटकर भी इंसान मुकम्मल होता है।

सर्वधिकार सुरक्षित मौलिक अधिकार एवं अप्रकाशित रचनाएँ

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि, व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर, नागपुर (महाराष्ट्र)

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