Uncategorized
Trending

अषाढ़ के पानी

विधा: कविता (वियोग)

अषाढ़ के पानी बरसे, भीग गई हर डाली,
सूनी मेरी राह मगर, सूनी रही दीवाली।

बादल ने संदेशा लाया, तेरी याद जगाई,
भीगी-भीगी हर साँसों ने, पीर नई दोहराई।

धरती हँसकर झूम रही, मन मेरा रोता है,
तेरे बिन हर सावन मुझको, विरह ही होता है।

खेतों में हरियाली छाई, मन में सूखा वन है,
तेरे बिन जीवन की धड़कन, जैसे मौन गगन है।

बिजली चमकी, मेघ गरजे, भीग गए सब द्वारे,
आँखों से भी बरस पड़े हैं, यादों के अंगारे।

अषाढ़ का पानी बोला— मिलन कहीं तो होगा,
मैंने कहा— विरह की राहों में ही जीवन संजोया।

बरखा थम जाएगी इक दिन, बादल लौटेंगे,
पर तेरी यादों के सावन, कब मुझसे रूठेंगे।।
रचनाकार
कौशल

मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *