
एक मित्र पिसवा के आटा घर लें जा रहा था ।
जहां उन्होंने घर बसाया था,,
और मैं आटे को शक्कर मिलाकर चिंटीयो को आटा खिलानें गया था,
जहां लाखों चिंटीयों ने मिलकर घर ही घर बनाकर,
एकता से रहना सिखाया है ,
पुण्य करने से
राहत मिलती है
और धर्म रक्षेयते,,,
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













