Uncategorized
Trending

समाज का दर्पण

समाजिक वस्तुस्थिति का सही अध्ययन ही समाज का दर्पण होता है
अच्छाई बुराई का समाजिक परिवेश मे संतुलित पदार्पण होता है

साहित्य हर पनपते समाज को साधने का संतुलित रखने का एक सटीक दर्पण होता है
ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का सार्थक विश्लेषण होता है

समाज मानव सभ्यता का एक संपन्न समृद्ध सांस्कृतिक पहचान होता है
जीवन को समझने जीने का बारीक एक निशान होता है

समाज मे अंधविश्वास, कुरीतियों समाजिक विषमता का व्यापक ही मिश्रण होता है
मानसिक शारीरिक उत्पीड़न की इंसानी फ़ितरत को उजागर करने का साहित्य ही एक चित्रण होता है

संपन्न समाजिक ताने बाने को एक सूत्र मे पिरोने का साहित्य ही एकमात्र माध्यम होता है
गुण दोषों को परखकर निभाने का शानदार साहित्य ही सफल निष्पक्ष निष्पादन होता है

समाज का दर्पण समाजिक परिवेश का एक दिग्दर्शन होता है
जागरूक समाज के बदलते हुए सोपान का सौर उत्सर्जन होता है


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *