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कविता

जिंदगी हर कदम एक नई जंग है
धर्म सदा ही अधर्म से लड़ा, धर्म कि रक्षा करने में अपने ही खून से लड़ा

चिड़ईयां का झुंड आसमान में अपने बच्चे को बचाने के लिए शिकारी बाज़ से लड़ा ।

हर छोटा पशु पक्षी,हिंसक जानवर से अपने प्राण की रक्षा के लिए लड़ा ।

क्यों कि बड़ा जानवर, छोटे जानवर को खा जाता है, फिर भी
आख़री सांस तक जी जान से लड़ा।

अनेकों सैनिकों का काफिला युद्ध में, कर्तव्य और धर्म कि रक्षा करने को लड़ा।

एक मां का होंसला
अपने बेटे को बचाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ा ।

एक भुखा पेट रोटी कमाने को गरीब हों या अमीर आदमी जिंदगी भर चुनौतियों से लड़ा ।

यह काल चक्र है यहां
स्वाभिमान के लिए समय हमेशा ही आन बान शान से लड़ा।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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