
जिंदगी एक सफर है,
कभी हंसाती है जिंदगी,
तो कभी रुलाती है जिंदगी,
हर नए मोड़ में कुछ खास
दिलाती है जिंदगी।
कभी चलते चलते रुक जाती हूं,
तो कभी किसी मोड़ में बैठे
खो जाती हूं,
बेहिसाब वक्त गुजर जाता है,
फिर एक नयी राह दिखाती है
जिंदगी।
कभी इतनी खुश हो जाती,
पंख लगा चिरैया बन उड़ने
का मन होता है,
और जब उदास हो जाती,
पूरी दुनियां रूठी सी लगती
है जिंदगी।
इस सफर से बहुत थक जाती हूं,
पता नहीं हौसला फिर से कब
आएगी,
खुशियां कब दस्तक देगी,
फिर से मुस्कुराना सिखाएगी
जिंदगी।
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़













