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जिंदगी एक सफर है सुहाना

इंतजार खत्म हो जाता है,
जब मुसाफ़िर की मंजिल आ जाती है ।

इसी तरह रेल के सफर में नये हमसफ़र जुड़ते जाते हैं ।

जब जिसको जहां जाना होता है।
जिसका स्टेशन आ जाता है वो उतर जाता है ,

जाने अंजाने नये मुसाफ़िर बेठतें है और मिलते-जुलते हैं

पल दो पल को सुखमय बनाते हैं,
इंसानियत का रिश्ता बना कर, लुत्फ उठाते हैं।

जीवन के हंसीन पलों को को एक उम्र सा जी जाते हैं ।।

जिंदगी एक सफर है सुहाना यहां कल क्या हो किसने जाना ,

यहि वो सफर है जो किसी को जीवन जीने का संदेश दे जाता है।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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