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कविता

क्या तुमने कभी देखा है
बेरहम चेहरा जो नज़र नहीं आता है
और अपना काम करना चाहता है।

क्या तुमने कभी
सुना है
खड़ी फसलों को कोई छुपके से आए और काट कर छुपके से चला जाए ।

क्या तुमने सच का सामना करना सिखा रहे
लोगों को सड़क पर पिटते हुए देखा है ,

क्या तुमने कभी देखा या सुना है
किसी की गुलाबों की बगिया को बेहया को आग लगाते हुए

क्या तुमने कभी देखा है किसी
गुलाम को बेरहमी से पिटते हुए देखा है,।

क्या तुमने कभी देखा है अपने बच्चों को बेरहमी से जानवर से बद्तर हालत में पिटते हुए और दर्द से कर्राते हुए।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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