
विधा : पद्य
जिस देश का सुदृढ़ आज है ।
उसी का मजबूत जहाज है ।।
जिस देश सौराष्ट्र महाराष्ट्र है ।
अपना ही भारत वह राष्ट्र है ।।
हिम ऑंचल लिया हिमाचल ।
अरुण ऑंचल ले अरुणाचल।।
वही विशेष अपना है भारत ।
जहॅं पांडव कौरव महाभारत।।
जिस भारत का सबसे प्यार ।
वहाॅ देव देवी का है अवतार ।।
जहॅं बुद्ध महावीर सम ज्ञानी ।
क्यों न हो भारत अभिमानी ।।
जहॅं आजाद बोस सा महान ।
क्यों न भारत करे गुणगान ।।
जहॅं लहराता तिरंगे का शान ।
जन जन का तिरंगा है प्राण ।।
अपना राष्ट्र अपनी संस्कृति ।
सादर प्रेम व्यवहार से प्रीति ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।









