
प्रेम नहीं कविताओं में,अब प्रतिरोध पढ़ा जाएगा
सत्य के पन्नो पर ,सोचा न था ,झूठ गढ़ा जाएगा
ये युग भी देख लिया , अब इन आँखों से अपनी
सती सावित्री , हरिश्चंद्र का युग न लोट कर आयेगा ।।
दहक रही अग्नि सब कुछ निगलने को हवन कुंड में
यहां लहु लुहान अपराधी भी , साधु संत ही कहलायेगा
बारम्बार छवि बदलता ,कलयुगी कालनेमि जब छाएगा
कोई सत्य न लिखेगा,तब झूठ का उपन्यास गढ़ा जाएगा ।।
यूँ मौन हो जाने पर भी ,न समय चक्र बदला जायेगा
आज सत्य न पहचाना तो , सब कुछ स्वाहा हो जाएगा
संवेदनाएं समाप्त होती जा रही , प्रेम विलुप्त होने पर
प्रेम की कविताएं नहीं , अब प्रतिरोध पढ़ा जाएगा ।।
आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर
भारत













