
बात दिल की मान कर तो देखो,
ज़िंदगी गीत गाने लगेगी,
जो दबे थे अरमान सीने में,
उनकी आवाज़ आने लगेगी।
क्यों सवालों में उम्र बीते,
क्यों हर ख्वाब अधूरा रह जाए,
एक कदम सच की ओर बढ़े तो,
डर का साया खुद दूर हो जाए।
बात दिल की मान कर तो देखो,
ज़िंदगी गीत गाने लगेगी…
भीतर बैठा जो बच्चा है,
आज भी राह निहारता है,
सुन लो उसकी सच्ची हँसी को,
वही तुम्हें खुद से मिलाता है।
बात दिल की मान कर तो देखो,
हर सुबह मुस्काने लगेगी,
अपने होने का अर्थ मिलेगा,
जब रूह सुकून पाने लगेगी।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र













