
ऊक्ती- भाग्य बदल सकता है कर्म का प्रतिफल नही बदलता है
जीवन के मूल मे कर्म ही प्रधान है
कर्म के मूल मे सुनीति का ही स्थान है
सुनीति मे ही सदकर्मों का वास होता है
मनुष्य के प्रबल कर्मसिद्धांतों का आभाष होता है
भाग्य जीवन के साथ होता है
कर्म का प्रभाव जीवन के बाद होता है
कर्म ऐसा कीजिये कि जीवन सफल हो जाये
प्रबल कर्मसिद्धांत से ही जग का कल्याण हो जाये
जीवन है जीवन के ही ऊसूलों पर ही चलायेमान ये सारा संसार है
बिन ऊसूल ये जंगलीयत का पूरा बाज़ार है
संदीप सक्सेना
जवलपुर म प्र













