
एक बात बोलूं साहेब,मरने पर जिसने मुझे मजबूर कर दिया आज वही आंसू बहां रही
है,मैं आंखे नहीं खोल रहा हूँ,यह बात आज सबको बता रही है,मुझसे क्या खता हुई
क्यों मुझसे वो नाराज हो गया है,आंखों में आंसू और दिल में दर्द है फिर भी उनको न
दया आ रही है,नसीब से गरीब थी लेकिन अपनों से भी गरीब हूँ आज समझ आ गई है,
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













