
हम याद करें उन वीरों को,
जिसने है विजय दिलाई थी |
शहीद हो गए देश की खातिर,
कारगिल पर फतह दिलाई थी|
नमन करें उन वीरों को हम,
जिसने सरहद पर जान गवाई थी |
मरकर भी उन सब वीरों ने,
इस तिरंगे की शान बढ़ाई थी |
इस भारत के दुश्मन ने यारों,
एक बार फिर मुक्की खाई थी|
एक एक दुश्मन को कारगिल में,
भारत के वीरों ने धूल चटाई थी|
कारगिल की उस चोटी पर,
जैसे भयंकर आंधी आई थी |
उड़ा ले गई दुश्मन को देखो,
जय हिंद जब की आवाज आई थी|
कवि राजेंद्र कुमार वर्मा
कोटा राजस्थान













