
मेंहदी की हर पात में, हरियाली का मान,
लाल रंग बन रच गया, प्रेम-प्रणय की शान।
सावन की फुहार में, महके इसकी गंध,
रिश्तों में भरती सदा, अपनापन का छंद।
हरियाली की गोद से, पाया जीवन-सार,
हथेली पर खिल उठे, अनुरागों का हार।
जितनी गहरी रच गई, उतना गहरा नेह,
विश्वासों के बंधन से, महका मधुमय गेह।
दुल्हन के सोलह श्रृंगार का, यह अनुपम सम्मान,
साजन के नामों संग, महके जीवन-गान।
मंगल, ममता, माधुरी, इसका मधुर प्रसाद,
सौभाग्य की ज्योति बने, प्रेम-अमर संवाद।
करुणा, स्नेह, समर्पण का, देती यह संदेश,
हरियाली से लाल बने, प्रेम रहे विशेष।
मेंहदी के इस रंग से, जीवन हो उजियार,
सुख-सौभाग्य संग रहे, महके हर परिवार।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













