
कारगिल के धवल गिरि पर दुश्मनों ना ललकारा था,
कुदृष्टि से दुश्मनी ने भारत को निहारा था,
छिपकर बैठे हुए थे बनाकर वे सब गुफा,
जैसे वो हो हमारे घर के रूसल फूफा ।
लेकिन दुश्मनों के चाल चल न सकी,
भारतीय वीरों के नजरों से बच न सकी,
समय रहते ही अहसास हो गया था हमारे वीरों को ,
खूब धूल चटाया था उन कायरो को ।
हमारे एक एक वीर खूब लड़े थे,
उन दुश्मनों के दस दस पर भारी पड़े थे,
हमारे निडर,निर्भय, बलिषठ वीर जवानों के सामने ,
मुंह के खायी थी दुश्मन टेक दिये घुटने ।
माना कि हमने भी खोये थे कुछ सपूतों को,
लेकिन दुश्मनों के प्राणों को सौप दिये थे यमदूत को,
हुई विजय हमारे वीरों को कारगिल के पहाडों में ,
भाग गये सारे सियार,सिंह के दहाडो मे ।
जय जय भारतीय वीरों करता हूँ सलाम ,
स्वीकार करो चुन्नू कवि का प्रणाम,
गर्व है हमसबो को अपने भारतीय वीरों पर,
सदैव रक्षा हेतु खड़े रहना सरहदो पर ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













