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कहां से चले थे कहां तक आ गए,

कहां तक और आगे को जाना है,

कैसे कैसे करतब दिखाए कभी जवानी में,

कैसे कैसे करतब दिखाते हुए रहना है,

प्यार कि परिभाषा को कहां से लेकर चले थे,

परिभाषा ने निभाना सिखा दिया और
परिवार दिया,

हमने समय था जो उम्र का सारा जीवन खर्च कर दिया,

परिणाम प्यार से निकलते रहे हैं
जीवन जीने का
एक मुकाम दिया,

घर आंगन छत देकर रिश्ता निभाना सिखा हमने तो,

मेरे जीवन साथी ने
खुद को सुब्रत करके

मुझे सहारा दिया। और समय दिया और दोनों
जहांन दिया

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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