Uncategorized
Trending

कारगिल विजय के अमर शौर्य से अनुप्राणित हुई कल्पकथा की 259वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार सोनीपत हरियाणा द्वारा कारगिल विजय दिवस विशेष 259वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का गरिमामय आयोजन राष्ट्रभक्ति, साहित्य-साधना और सांस्कृतिक चेतना के समन्वित वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के विविध अंचलों से जुड़े प्रबुद्ध साहित्यकारों ने कारगिल के अमर रणबांकुरों के अदम्य शौर्य, राष्ट्रसमर्पण तथा भारतीय सैन्यबलों के अतुलनीय पराक्रम को अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण काव्याभिव्यक्तियों के माध्यम से श्रद्धापूर्वक नमन किया।

संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह की सूचना के अनुसार कार्यक्रम का सफल संचालन कीर्ति त्यागी ने अत्यंत सुसंगठित एवं प्रभावपूर्ण शैली में किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित सुन्दरलाल जोशी ‘सूरज’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रेमलता कुमारी पुष्पेश की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इन मंगलाचरणों ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिरस, ज्ञान एवं राष्ट्रनिष्ठा के दिव्य आलोक से आलोकित कर दिया। तत्पश्चात काव्यपाठ का क्रम प्रारंभ हुआ, जिसमें डॉ. पंकजवासिनी, रमापति मौर्य, प्रेमलता कुमारी पुष्पेश, भेरुसिंह चौहान ‘तरंग’, डॉ. गजेंद्र हरिहरनो ‘दीप’, डॉ. अखिलेश्वर मिश्रा ‘अकाट्य’ विजय रघुनाथराव डांगे, सुंदर लाल जोशी सूरज, कीर्ति त्यागी राधा श्री शर्मा ने अपनी सशक्त, ओजपूर्ण एवं संवेदनाप्रवण रचनाओं के माध्यम से कारगिल विजय के स्वर्णिम इतिहास, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण तथा राष्ट्ररक्षा के अमर आदर्शों का भावपूर्ण स्मरण कराया।

समूचे आयोजन में साहित्य और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत समन्वय दृष्टिगोचर हुआ। प्रत्येक प्रस्तुति ने वीरगाथा परंपरा को नवीन ऊर्जा प्रदान करते हुए श्रोताओं के अंतर्मन में राष्ट्रगौरव, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदानी चेतना का संचार किया। साहित्यकारों ने अपने काव्य के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि कारगिल के अमर सेनानियों का पराक्रम भारतीय जनमानस के लिए सदैव प्रेरणा का अक्षय स्रोत बना रहेगा।
कार्यक्रम के समापन चरण में राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में सामूहिक राष्ट्रगीत-गायन किया गया। इसके उपरांत राधा श्री शर्मा ने आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों तथा समस्त दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित किया। अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगलमय शांति-पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम प्रदान किया गया। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता का प्रेरणादायी संगम सिद्ध हुआ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *