
गुरु चरणों में शीश नवाए,
सारे पाप मिट जाएं।
अज्ञान तिमिर हर ले पल में,
ज्ञान दीप जगमगाए॥
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु हैं,
गुरु ही शिव अवतार।
गुरु कृपा से मिलता जग में,
भव से बेड़ा पार॥
बिन गुरु ज्ञान न उपजे कोई,
बिन गुरु मिटे न ताप।
गुरु की महिमा अपरमपार,
गुरु ही काटें संताप॥
गुरु डांटे तो आशीष है,
गुरु समझाए ज्ञान।
गुरु के वचन अमृत जैसे,
गुरु ही सच्चा भगवान॥
मात-पिता गुरु रूप में,
पालें सिखलाएं।
जीवन नैया पार लगाएं,
नयी राह दिखलाएं॥
जो गुरु शरण में आ गया,
वो जग से न्यारा होय।
गुरु की कृपा जिस पर बरसे,
उसका जीवन सफल होय॥
गुरु मूरत मन में बसाओ,
गुरु नाम जप लीजै।
भव सागर से तर जाओगे,
गुरु चरणन शीश दीजै॥
गुरु बिना गति नाहीं जग में,
गुरु बिना नहीं कल्याण।
गुरु शरण जो पड़ गया,
पाया उसने निर्वाण॥
शिखा पाण्डेय
सरायपाली, छत्तीसगढ़













