
गुरु महिमा अनंत है, कैसे करूँ गुरू की बखान?
गलती को क्षमा करें, स्वीकार करे चुन्नू कवि का प्रणाम
प्रथम पूज्य तो गुरु है,फिर पूजो भगवान
गुरू ने ही तो कराये हमे, भगवान की पहचान
जो पूजै गुरू को,वो मानो पूज लिया संसार
गुरू बिन ये जो है जीवन, मिथ्या और बेकार
गुरू कौन है,?ये भी लो तुम जान
जो अंधेरों में भी दिखलाये रोशनी,उसे ही गुरू लिजिये मान
माता-पिता है प्रथम गुरू,इसे स्वीकार करो इंसान
बोलने,चलने,खेलने कराया है शुरू,मत इसे भूलो इंसान
हरेक प्राणी है गुरू समान,यदि आये वो तेरे काम?
सिर्फ इंसान ही होते हैं गुरू,ये भ्रम मे ना रहें इंसान
गुरू का कद है बहुत बड़ा, गुरू के आगे कोई ना है खड़ा
गुरू बिना ये जीवन हमारा,एकदम है सिर्फ अधुरा-अधुरा
कैसा हो गुरू?कैसे दूं परिभाषा?,अक्षर बोध कराये वो है गुरू
या जीवन की बताये सार,या जिंदगी की भेद को कराये शुरू
गुरू वही है जो तेरे,मस्तिष्क की खोले द्वार
भले वो हो पढें लिखे,या जाने जीने के महत्व की आधार
ऊँच नीच,सुख दुख,भले बुरे,कि जो कराये पहचान
वही है सर्वश्रेष्ठ गुरू,उसे दिजिये उचित सम्मान
गुरू की महिमा, गुरू की बखान,मे यदि हुई है कोई गलती
चुन्नू कवि*को कर देना क्षमा , करता हूँ सबो से विनती
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड











