
गुरु की कृपा अगर हो जाए!
लघुता शीर्ष शिखर छा जाए !!
गुरु की कृपा अगर हो जाए,
माया मोह निकट नहीं आए !
भ्रमजालों का भेदन करके,
बुद्धि विवेक का बोध कराए!
ज्ञान वर्तिका आलोकित कर,
अंधकार से मुक्ति दिलाए!
गुरु की कृपा अगर हो जाए!!1!!
ऊंच-नीच का भेद मिटाए,
सहृदयता,सद्भाव जगाए !
अंतस्तल को निर्मल करके,
भवसागर से पार लगाए !!
शरणागत होकर के देखो,
जीवन में आनन्द समाए!
गुरु की कृपा अगर हो जाए!!2!!
रूप राशि से ध्यान हटाकर,
जीवन को मधुमास बना कर !
भर देता आनन्द हृदय में,
अंतर्द्वंद से मुक्ति दिला कर!!
गुरु ज्ञानानंद नाथ की प्रज्ञा,
‘जिज्ञासु’ जन प्रखर बनाए!
गुरु की कृपा अगर हो जाए!!3!!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’











