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गुरु दीपक की जोत

1.गुरु दीपक की जोत सम,
करें चहुंदिश उजियार।
दीप्तिमान बाती जले,
रोशन हो संसार।

2.गुरु दीपक की जोत है,
जग फैलाए प्रकाश।
तम रूपी अज्ञान को,
मैटत करें प्रकाश।।

3.गुरु गुणों की खान है,
गुरु भव की पतवार।
गुरु के ज्ञान से उबरे,
शिष्यों का संसार।।

4.गुरु कुम्हार का रूप है,
गढ़ते हाथ सहार।
माटी से मूरत गढ़े,
अमूल्य है उपकार।।

5.गुरुजन होते है सदा,
जीवन की पतवार।
उनसे ही हम सीखकर,
रचते नव संसार


भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश

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