
आओ बच्चों, गुरु चरणों में
शीष नवायें
साक्षात ईश्वर है, गुरु उनके
ही गुण गाएं
प्रथम गुरु ,माता-पिता-भ्राता
उनको पुष्प चढ़ाएं
अर्चन करें, सेवा करें वंदना
शिक्षा प्रसाद पायें ।
सुमिरन से महर्षि वेदव्यास कै
पाप सभी कट जाएं
आज है गुरु पर्व उनका
जन्मदिन मनाएं
वेद और महाभारत के ज्ञाता
की अलख जगाएं
सुमिरन करें सब गुरुओं का भवसागर पार हों जाए
राम वल्लभ गुप्त ‘”इंदौरी”











