
कलम के सिपाही प्रेमचंद
शत शत करती हूं नमन।
महक उठी जिनकी कलम से
साहित्य- क्यारी और चमन।
भारत की शोषित जनता की
पीड़ा के अन्वेषक थे।
निर्मला,गोदान,गबन
रंगभूमि,कर्मभूमि अद्भुत लेखक थे।
टूटी छप्पर,झोपड़ी की
भोली मानवता को जिया।
ग्रामीण जीवन को अपने
साहित्य माला में पिरो लिया।
यथार्थ चित्रण, शैली अनमोल
धनपतराय” सारस्वत “धनी।
हिंदी साहित्य में सदा रहेगी
शेष स्मृतियाँ अमर बनी।
डॉ नवनीता दुबे नूपुर,मंडला













