गली गली में गूंज रहा, एक ही नारा,
ये मिट्टी हमारी है, ये देश हमारा।
जब तक सूरज की रोशनी, धरती पर रहेगी,
जब तक चांद सितारे, आसमां में चमकेंगे,
तब तक भारत का नाम, अमर बना रहेगा।
हिमालय से कन्याकुमारी तक, एक ही आवाज,
भारत माता की जय, भारत माता की जय।
धर्म अलग, भाषा अलग, हो सकती है,
पर दिल सबका एक ही, धड़कन में बसता है।
एक देश, एक तिरंगा, एक ही सम्मान,
यही हमारी सबसे बड़ी, पहचान है।
सीमा पर जवान, देश की रक्षा करता,
खेतों में किसान, अन्न सबको देता।
लैब में वैज्ञानिक, नाम रोशन करता,
क्लास में शिक्षक, भविष्य को गढ़ता।
नफरत की दीवारें, हम गिरा देंगे,
मोहब्बत के पुल, हम बना देंगे।
जात पात के झगड़े, हम भुला देंगे,
कंधे से कंधा मिला, आगे बढ़ेंगे।
शहीदों का कर्ज, हम चुकाएंगे,
मेहनत और ईमान से, निभाएंगे।
भ्रष्टाचार को जड़ से, मिटा देंगे,
हर बच्चे को शिक्षा, दिला देंगे।
आओ मिलकर शपथ, आज हम लेते हैं,
नया भारत मिलकर, हम बनाते हैं।
झुकेंगे नहीं, बिकेंगे नहीं, टूटेंगे नहीं,
सीना तान कर यही, नारा बोलेंगे।
एक, दो, तीन, चार,
भारत माता की जयकार।
एक, दो, तीन, चार,
हिंदुस्तान जिंदाबाद।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)












