
सकारात्मक होना भी एक तपस्या है क्योंकि समाज में नकारात्मक लोगों की कमी नहीं। शिकायतों की प्रवृत्ति का व्यक्ति नकारात्मक होता है। ऐसा व्यक्ति मानकर चलता है कि कुछ होने वाला नहीं, व्यर्थ प्रयास करने की क्या आवश्यकता है। ऐसे व्यक्ति के लिए सकारात्मकता एक ढकोसला मात्र होती है। यह लोग मानकर चलते हैं कि व्यवहारिक जीवन में सकारात्मक होना संभव ही नहीं। यह मात्र किताबी ज्ञान है।
ऐसे व्यक्ति की संगत आपके सम्पूर्ण प्रयासों और शक्ति का ह्रास करती है। आपके सकारात्मकता की दिशा में लिए गए हर कदम, हर प्रयास को पीछे धकेलती है। ऐसा व्यक्ति आपके सम्बन्धियों में, मित्र मंडली में या समाज में कहीं भी मिल सकता है। आवश्यकता है ऐसे व्यक्ति को पहचानने की और उससे दूरी बनाने की। तभी आप अपनी सकारात्मक सुगंध को बिखेर पाएँगे।
मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
लेखिका एवं कवयित्री
श्री ठाकुर
देवघर, (झारखण्ड)











