वक्त की लाठी जब तुम पर पड़ेगी,
तो अकड़ सारी धरी की धरी रह जाएगी।
चाहे जितना भी पढ़ा-लिखा बनो,
गुस्से में जुबां से कड़वाहट निकल जाएगी।
वक्त की लाठी जब तुम पर पड़ेगी।
जिन आंसुओं को तुम कमजोरी समझते थे,
वही आंसू जब तुम्हारी आंख से गिरेंगे।
तब समझोगे दर्द का वजन क्या होता है,
तब हर लफ्ज़ की कीमत समझ में आएगी।
वक्त की लाठी जब तुम पर पड़ेगी।
ताकत के नशे में इंसानियत मत भूलो,
क्योंकि कुर्सी, पैसा, ओहदा सब अस्थाई है।
जिन पर आज तुम हंस रहे हो,
कल वही नजारा तुम्हारे दरवाजे पर आएगा।
वक्त की लाठी जब तुम पर पड़ेगी।
रिश्ते, इज्जत, नाम सब एक पल का खेल है,
एक चोट में सब बराबर हो जाएगा।
इसलिए जीते जी रहम कर लेना,
क्योंकि वक्त की लाठी सब पर चलती है।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)












