
कभी कभी चलते चलते हम थक जाते है।
उजाले कम नजर आते है।
जिंदगी की हर राह कह रही होती है हमसे,
अब कुछ भी तो नहीं बचा।
सारे ख्वाब टूट से जाते है।
उम्मीदें भी रूठी सी लगती है।
किस्मत की लकीरें भी बदली बदली सी रहती है।
तभी एक हल्की सी आवाज हवा के संग कानों में पड़ती है।
डर कर रुकना नहीं है तुझे।
बस एक कदम बढ़ा तो सही।
और फिर —
सच में वही एक कदम।
हमारी किस्मत के लिए यू टर्न साबित हो जाता है।
धीरे धीरे अंधेरी गलियों में रोशनी नजर आती है।
जिंदगी का अंधेरा छट सा जाता है।
उजाला जीवन में बिखर जाता है।
जो खोया था कभी सब मिल जाता है।
जीने का हौंसला अपने संग लाता है।
तब हमें यह एहसास दिलाता है।
किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है।
जो गिर गिर कर भी संभलना जानते है।
अंधियारों में भी मुस्कुराना जानते है।
हर मोड़ कभी अंत नहीं होती।
कभी कभी वहीं से नई शुरुआत होती है।
जहां से हम हार जाते है।
कभी कभी वहीं से किस्मत यू टर्न दिखलाती है।
फिर जिंदगी संवरती चली जाती है।
इसीलिए तो मंजू की लेखनी सभी से यही कहती है।
कभी न रुकना कभी न डरना।
जिंदगी में किस्मत का यू टर्न कैसे दिखेगा वरना।।
मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)













