
श्रावण मास की हरियाली है चऊं ओर खुशहाली है
प्रकृति हरितिमा की छटा पावन है
मौसमों का राजा आया सावन है
भोलेनाथ का अदभुत दिव्य श्रंगार है
अभिषेक करता दिव्य पानी मुसलाधार है
शिव ही कर्म है तपते जीवन का शीतल आधार है
आदि भी तुम हो भोलेनाथ अनंत भी तुम सार हो
सारे जग के आप पालनहार हो
शिव ही रक्षक विनाशक भी शिव है
पाप ओर पुण्य के वाचक भी शिव है
समस्त प्राणी पशु पक्षी प्रकृति देव गन्धर्व राक्षस मे पूज्य शिव ही देव है
आप ही अनादि से अनंत देवों मे देव महादेव है
सावन के आराध्य शिव सर्वत्र ही विद्यमान है
सर्वेश्वर दिग्वेश्वर माहेश्वर प्रभु आप ही युग्दृश्टा त्रिनेत्र भगवान है
आपको मेरा बारम्बार प्राणाम है
शिव ही शक्ति शिव ही दृस्टा दिगम्बर दिगमान है
भोलेनाथ आप ही आदि अनंत हो सर्वमान्य है ।
जय भोलेनाथ हर हर महादेव
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













