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बस यूँ ही…

बस यूँ ही…..
बस यूं ही एक दिन,
मैंने समय से पूछा_ ” इतनी तेजी से कहां भागे जा रहे हो? ” वह मुस्कराया और बोला_
” मैं नहीं भागता”
भागते तो लोग हैं,
मैं तो बस चलते रहता हूं |

बस यूँ ही….
एक पत्ता डाल से टूट कर गिरा,
उसने सिखा दिया__
हर बिछड़ना अंत नहीं होता,
कभी-कभी जमीन से मिलकर ही
हरियाली जन्म लेती है|

बस यूँ ही….
सुबह की पहली किरण,
खिड़की पर दस्तक दे गई,
और कह गई__
अंधेरा कितनी भी गहरा हो,
एक छोटी सी रोशनी,
उसे हर दिन नया उत्तर दे देती है |

बस यूँ ही….
मैं गांव की उस पगडंडी पर चला,
जहां मिट्टी की महक,
रिश्तो से भी गहरी लगती थीl
जहां तुलसी के चौरे की खुशबू,
दादी की कहानियाँ,
मां की पुकार,
और पिता की मेहनत,
जीवन का सबसे सुंदर गीत थीl

बस यूँ ही…..
शहर की भीड़ में देखा,
हर चेहरा मुस्कुरा रहा था,
पर आंखों में कहीं ना कहीं,
थकान की एक समंदर छिपा था
तब समझ आ गया,
मुस्कान हमेशा,
खुशी की भाषा नहीं होती

बस यूँ ही….
बरसात आई,
कुछ आंसू भी साथ लाई l
मगर बादलों ने बताया__
जो बरसते हैं,
वही धरती को जीवन देते हैं|
दर्द भी कभी-कभी,
नई उम्मीद की फसल,
उगा देता हैl

बस यूँ ही…..
एक मां को देखा,
जो आधी रोटी खाकर भी,
बेटे की थाली भर रही थीl
उस दिन लगा __
ईश्वर मंदिर में कम,
माँ की ममता में ज्यादा रहता हैl

बस यूँ ही……
एक दिन,
पिता की हथेलियां की लकीरों में,
पूरे परिवार का भविष्य लिखा मिला,
उनकी खामोशी में,
हजारों अधूरे सपनों की आवाज थीl

बस यूँ ही…..
नदी किनारे बैठा रहा,
लहरें आती रही,
जाती रहीl
उन्होंने सिखाया __
रुक जाना पानी का फितरत नहीं,
और चलना ही जीवन का दूसरा नाम हैl

बस यूँ ही……
एक बूढ़े बरगद ने कहा__
“बेटा ऊंचा बनने से पहले,
जड़ो को मजबूत करना सीखो “
जिसकी जड़े मिट्टी से जुड़ी होती है,
उसे आंधियां गिरा नहीं पाती l

बस यूँ ही…..
जिंदगी को,
कठिन मत बनाइये,
कभी पेड़ो की,
छांव में बैठिए,
कभी बारिश में
भीगा कीजिए,
कभी किसी अनजान की,
मदद कीजिए,
कभी अपनी भूल पर,
मुस्कुरा दीजिएl

क्योंकि अंत में_
याद नहीं रहता कि,
हमने कितना कमाया था,
याद रहता है कि,
कितना जिया था,
कितना प्रेम किया था,
और कितने दिलों में,
अपनी जगह बनाई थीl

बस यूँ ही……
एक दिन यह सफर भी,
समाप्त हो जाएगा l
पर यदि जीवन में प्रेम,करुणा,
और सच्चाई से जिया होगा,
तो हमारे जाने के बाद भी,
हमारी मुस्कान,
हमारे शब्द और हमारे कर्म,
लोगों के यादों में,
एक मधुर गीत बनकर गूंजते रहेंगे…..

पूनम कुमारी
मधुबनी बिहार

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