
ऐ सावन की बूँदे
अक्सर मेरे अंतस में छा जाती है
धीरे धीरे ऐ मेरे बीते सावन को दोहराती है
बीते सारे सावन मेरे आँखों के आगे आते है
माँ की मीठी सी छुअन अब भी अपना अहसास दिलाती है
मौंसी नानी दादी बुआ तो चाचा चाची मामा मामी
सब ही सिर्फ लगते अपने थे
उनके साथ बिताए पल तो निज अपने थे
मायका छूटा सब छूट गये
ससुराल वाले आज अपने है
अनके साथ जिए पल भी अपने है
सावन की हवा होती है अलग
मायका याद आता है हर पल
बचवन के वह तीज त्यौहार
मेहंदी लगाना फ्रॉक पहन होना तैयार
लगता है कल ही की बातें है
आँख मूंदने पर दिखती
तुरन्त अतीत की बाते है
आँखों से ऑसू निकलते हैं
जब याद आती सब सावन . की बाते है
मायके का वह अपनत्व
मेरे जीवन की सौगाते हैं
ऐं सावन ऐ यादें आप ही लाते हैं
मेरे मन को अंदर तक भिगोकर जाते हैं
शीलू जौहरी भरूच











