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कैसे ढूँढू रघुवर मैं पता आपका

मन भटकते भटकते परेशान है
अब तो केवल आसरा बचा आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूँढू रघुवर मैं पता आपका
सुनता हूँ उसका जीवन सँवर जाता है
जिसपे होती करम की नज़र आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूँढू रघुवर मैं पता आपका
अपने चरणों से क्यों दूर रखा मुझे
आप ही से शिकायत करूँ आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूँढू रघुवर मैं पता आपका ।।

कुलदीप

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