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मारुति नंदन


मारुति नंदन हे दुख भंजन,
विनती सुनो हमारी!
आया हूं मैं शरण तुम्हारे,
रक्षा करो हमारी!!

संकट मोचन संकट हर कर,
विपदा टारो सारी!
करुं अर्चना प्रतिपल तेरा,
सुनलो अरज हमारी!!

दुष्ट दमनकर शोक समनकर,
बाधा हरते सबकी!
संकट से हूं तस्त्र हे स्वामी,
शरण में ले लो अब की!!

नाथ अनाथ हुआ है सेवक,
है बस आस तुम्हारी!
‘जिज्ञासु’ जन अर्चन करते,
रख लो लाज हमारी!!

कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’

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