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सावन के झूले

प्यार का एहसास है मन में जगाया,
प्रियतम देखों सावन का मौसम आया।
आमों की डाली पर झूला लगे,
झूलने की पिया संग मचल उठें।

कोयल गावे है मीठीं बोलीं,
पवन चले है मानसून लहरिया।
झूला झूलावे पिया डगरिया,
गावे हे मन सावन बदरिया।

बूँदे गिरे ज़ब तन पर आकर,
मीठीं-मीठीं करे हे बतिया।
सावन का झूला है प्यारा,
बहारे लाए खुशियाँ में जग सारा।

कवयित्री ज्योति बरनवाल,
नवादा (बिहार)

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