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साँझ ढली जब तेरा ख़याल आया

तुझको देखा तो इश्क़ याद आया,
साँझ ढली जब तेरा ख़याल आया।

नज़र मिली थी जब तुमसे पहली,
दिल में जाने कैसा सवाल आया।

तपती धूप में चाहत थी बादलों की,
सावन आया तो तेरा ख़याल आया।

फ़लक में तारे अनगिन टिमटिमाए थे,
चाँद को देखा तो तेरा ख़याल आया।

बहार थी तेरे चमन में निशिदिन,
देखने तुझको मैं तेरे उद्यान आया।

मंद-मंद पवन बह रही थी फ़िज़ाओं में,
जब बसंत आया तो तेरा ख़याल आया।

सखियों से ज़िक्र तेरा ही करते थे,
तुम न आई, तेरा रूमाल आया।

तेरी यादों में कटती रहीं रातें,
बढ़ी जो तड़प, फिर सब्र संभाल आया।

तुमको देखा था कुएँ पर कुछ पल,
वक्त मिला भी तो अल्पकाल आया।

शर्त थी साथ जीने-मरने की,
वरमाला का फिर वो साल आया।

कटा विरह का समय जैसे-तैसे,
मिलन हुआ तो नैनीताल आया।

रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड

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