
हर एक की ज़िन्दगी
में ग़म बहुत हैं,
और
ख़ुशियाँ वो तो बहुत कम हैं,
जो प्यार के क़ाबिल नहीं
ऐसे हमदम बहुत हैं,
सच को जीने न दें,
झूठ के तो चाहने वाले बहुत हैं,
इंसानों के भेष में जानवर बहुत हैं,
बन रहा इंसान दरिंदा,
आँखें बहुत नम हैं,
चारों तरफ निराशा में जीवन,
और हिम्मतों में ख़म बहुत हैं,
कोई जिये तो जिये कैसे सबकी
जिंदगी में दुःख कम नहीं बहुत हैं
कट तो जाएगी ही जिंदगी
आंखों में सपने भी जो बहुत हैं
सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद जो बहुत है।











