
खेतों का क्या है,
आज किसी का कल किसी का है,
फुल खिलाएं कोई और,
गले में हार पहनाकर खुशियां मनाई जाएं कहीं ओर।
जर जोरू जमीन पर क्या गुमान करना, साहब,
सबने देखा है ज़माने का दस्तूर है, जो है वो
कल बाप का आज मेरा ,
फ़िर कल बेटे का ,
अगर इज़ाफ़ा न हुआ तो परसों किसी ओर का,,,
ऐसा ही किया जाता रहा है। ।
मोहब्बत के दुश्मनों ने,
खेती से, फसलों से, और फुलों से प्यार किया होता तो स्वर्ग जमीं पर होता ,
बेचते नजर नहीं आते
मुझे फुलों से प्यार हो गया है,,
कलियां मन को छूने लगीं है,
हरियाली मन महकाती है,
खुशियां लेकर आए सावन, खुश्बू हि खुश्बू हैं फिजाओं में,
दिल में चाहत जिंदा रखोगे तो,
तो सपने भी पुरे
सच होने में वक्त नहीं लगेगा ।।
गमलों में फुल खिलाएं जा सकते हैं,
गेंदे , ग़ुलाब ,चम्पा , चमेली , गुलदाऊदी और मोगरा।।
सो तो है,
जो भी है
मन को भाते हैं
जो भी है।
अशोक सुमन भवानी मंडी। (राज.)











