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हर रिटायर्ड इंसान की ज़िंदगीमें तीन स्टेज होते हैं।


वे हैं… स्टेज (1) – उम्र 58 से 64
स्टेज (2) – उम्र 65 से 71
स्टेज (3) – उम्र 72 से 77 +

स्टेज 1- उम्र 58 + से …
इस समय, आपका वर्कप्लेस आपको छोड़ना शुरू कर देगा। चाहे आप अपनी वर्किंग लाइफ में कितने भी सक्सेसफुल या पॉवरफुल रहे हों।
…अब आपको एक आम इंसान की तरह देखा जाएगा। इसलिए, अपनी पुरानी पोजीशन के घमण्ड और उस एटीट्यूड से चिपके मत रहिए।

दूसरा स्टेज – उम्र 65 से 71
इस उम्र में, समाज धीरे-धीरे आपको छोड़ना शुरू कर देगा। आप पुराने साथियों से नहीं मिलेंगे और काम के दोस्त भी कम हो जाएंगे।
आपके पुराने काम की जगह के कई लोग भी आपको नहीं पहचान पाएंगे।
यह मत कहो कि –
” मैं वहां था ” और ” मैं वहां भी था “
क्योंकि- नई पीढ़ी आपको नहीं जानती; इसके लिए दुःखी मत होइए।

तीसरा स्टेज – उम्र 72 से 77 +
इस स्टेज पर, परिवार धीरे-धीरे
आपको छोड़ना शुरू कर देगा।
बच्चों और नाती-पोतों के साथ भी आप ज़्यादातर अपने पार्टनर के साथ या अकेले ही रहेंगे, अगर वे कभी-कभी आते हैं, तो यह उनके प्यार का इज़हार है।
उनके कम आने के लिए उन्हें दोष न दें; वे अपनी ज़िंदगी में व्यस्त रहते हैं।
और
… 77 साल की उम्र के बाद तो यह
धरती भी आपको छोड़ना चाहेगी।
यह प्रकृति का शक्ति-संतुलन (Balance of Power) नियम है। इसके आगे आपको कोई नहीं बचा सकता है। जीवन का पर्दा कभी भी गिर सकता है।
उस समय दुःखी न हों, ना ही पछताएं ~ यह ज़िंदगी का नियमित चक्र एवं अंत है, हर कोई इसी रास्ते से गुजरा है एवं शेष को भी यहीं से ऐसे ही गुज़रना है। इसलिए,
जब तक आपका शरीर स्वस्थ है,
शेष ज़िंदगी का पूरा आनंद लें।
जो पसंद हो – वो खुशी से खाओ,
जो पसंद हो – वो सहर्ष उत्साह से करो, खेलो…और एन्जॉय करो … एवं खुश रहो।
प्यारे सीनियर सिटीजन्स मित्रों !
~ सभी मित्रों से अक्सर मिलते रहो।….
और फ़ोन पर भी टच में रहो तथा पुरानी यादों को ताज़ा करो और एन्जॉय करो।
क्योंकि –
यह जीवन सिर्फ और सिर्फ एक बार का ही है।
हमेशा खुश रहो
यही हमारे हाथ है।

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