
साबरमती से यूं निकले बापू,
वो चंपारण की नित राह चले।
अहिंसा की इक लाठी उठाकर,
बापू आजादी की ओर बढ चले।।
सुखदेव, भगतसिंह बाहर निकले,
वो सब गरम दल के यूं साथ चले।
इंकलाब जिंदाबाद बार बार बोले,
वो फाँसी के फंदे से यूं गले मिले।।
लालाजी लाठियों से तड़पते रहे,
आजाद सीना तानकर खड़े रहे।
सरफरोशी की तमन्ना हमारे दिल में है,
बिस्मिल क्रांति के दीपक जलाते रहे।।
गौरों को हम सबने बाहर किया,
मिलकर देश को आजाद किया।
बाबा साहब ने कलम से शौर्य दिखाया,
संविधान लिखकर यूं इतिहास रचाया।।
नेहरू, शास्त्री, इंदिरा ने देश को जगाया,
राजीव, अटल,मनमोहन ने आगे बढाया।
फिर अंहकार का जेन जी से सामना हुआ,
झुकाकर सत्ता को अपना लोहा मनवाया।।
मुन्ना राम मेघवाल ‘भाटी’।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।













