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कविता

कल किसी नये मेहमान से मुलाकात हो गई,

दो पलों में हि दिल की बात हो गई,

कुछ उसने सुनाई और कुछ मैंने कही ,

ऐसा लगा कि
तपती जमीं पर, बरसात हो गई।

कुछ होतें हैं यहां पहचान के लोग जो
रोज़ रोज़ ही मिला करतें हैं,

पहचान वाले लोग दिल खोलकर बोलते नहीं,

आप अपना कोई अजित मित्र बनाना चाहते हो तो,

सारे जहां में मुस्कान लुटाना होगा,

रात का अंधेरा छटा कर,
सुबह की किरण लाना होगा,
मुस्कानों की कलियां खिला कर,
दिल के गुलशन को महकना होगा।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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