
हिमालय की गोद में, शिव का सुंदर धाम,
चाँदनी रात में गूँज रहा, भोलेनाथ का नाम।
काले शिवलिंग पर जलधारा, श्रद्धा बनकर बहती,
फूलों की खुशबू भक्ति की, हर दिशा में कहती।
त्रिशूल खड़ा है पास में, शक्ति का संदेश लिए,
डमरू जैसे कह रहा हो, शिव हैं हर श्वास लिए।
पर्वत चुप हैं, नदियाँ गातीं, महिमा तेरी अपार,
मंदिर की दीप-ज्योति कहती, तू ही पालनहार।
चाँद भी तेरे मस्तक पर, अपनी शीतलता बरसाए,
तेरी भक्ति में डूबा मन, हर चिंता भूल जाए।
हे नीलकंठ! जीवन-पथ पर, अपना हाथ बनाए रखना,
दुख की घड़ी में भोले बाबा, हिम्मत देते रहना।
तेरे चरणों में मिलती है, मन को सच्ची शांति,
तेरे नाम से मिट जाती है, जीवन की हर भ्रांति।
हर हर महादेव की गूँज से, पावन हो संसार! 🔱
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र













