
वतन की ख़ाक में जन्नत का सिलसिला देखा,
हर एक वीर के लहू में मैंने हौसला देखा।
तिरंगा जब भी खुली धूप में लहराता है,
हर एक दिल में नया देश का हौसला देखा।
न धर्म बाँट सका, न कभी ज़ुबाँ ने बाँटा,
हमारी एकता में मैंने काफ़िला देखा।
क़लम भी हाथ में हो, हाथ में हुनर भी रहे,
यही तो देश के उजले कल का रास्ता देखा।
बेटियाँ जब भी पढ़ीं, रोशन हुआ हर इक आँगन,
उन्हीं के साथ बदलता हुआ फ़लसफ़ा देखा।
खिलाड़ियों ने जहाँ तिरंगा ऊँचा कर दिखाया,
वहीं भारत का चमकता हुआ हौसला देखा।
न भ्रष्ट सोच रहे, न किसी से द्वेष रहे,
यही स्वतंत्र भारत का आईना देखा।
चलो प्रण आज यही, देश सबसे पहले हो,
इसी विचार में भविष्य का उजाला देखा।
दुआ है “हिंद” सदा अमन का चमन महके,
हर एक दिल में तिरंगे का ही उजाला देखा।
रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान, बिहार













